इतना बड़ा नेता हमेशा ही तो फ्री नहीं होता है कि पार्टी में हो रहे हर फेरबदल की जानकारी उसे हो. अगर कांग्रेस पार्टी ने पुराने नियम कायदों को बदल दिया और उसकी जानकारी वरिष्ठ नेताओं को नहीं दी तो इसमें हमारे अर्जुन सिंह जी की क्या गलती है. उन्हें तो वही पुराने नियम मालूम है. और उन्हीं को क्या सभी पुराने कांग्रेसियों को उन्हीं नियमों की जानकारी है. अब भइया कोर्स बदल गया है तो उसकी जानकारी सार्वजनिक तो की ही जानी चाहिए थी. लो देखो हम तो सिर्फ अर्जुन जी की ही गलती समझ रहे थे यहाँ तो करूणानिधि जी, प्रणव मुखर्जी तक को जानकारी नहीं थी. काफी दिनों बाद थोड़ा सा समय इन लोगों को मिला था तो उसका इस्तेमाल उन्होंने राहुल गाँधी को प्रधान मंत्री के रूप में पेश करने की बात कह कर किया. जमाना ख़राब आ गया है अर्जुन जी, आजकल सीधी बात भी कोई पसंद नहीं करता. आश्चर्य की बात ये है की सदियों पुरानी परम्परा को कैसे कोई इतनी आसानी से खत्म कर सकता है. मुगलों के ज़माने में सबसे अधिक चापलूसों की ही चलती थी. इस मामले में अंग्रेज भी किसी से पीछे नहीं रहे. कांग्रेस का जमाना आया तो सभी जानते हैं कि चमचा गीरी का क्या आलम था. जिस काम को करते करते हमें जमाना हो गया हो उसके बारे में अचानक ये फरमान कि चमचागीरी नहीं चलेगी. ज्यादती है भाई. अब ये तो सोनिया जी नहीं कह सकतीं कि राहुल गाँधी को प्रधानमंत्री बनाना ही नहीं चाहतीं. हाँ ये हो सकता है कि उनकी एंट्री जरा सलीके से हो. फिर ये कोई वक्त भी तो नहीं था ऐसी बात उछालने का अभी तो महंगाई वैसे ही दम लिए ले रही है. इस समय तो अपने मनमोहन जी ही ठीक है. उन्हें सब झेलने कि आदत है. और हाँ अर्जुन जी आप एक बात तो भूल ही गए मनमोहन जी हर तरह की बात मान जाते हैं राहुल थोड़े ही हर बात मानने वाले है. अब जब आदत हो ही गई है तो कुछ समय तो और हुकुम चला लेने दो फिर पता नहीं मौका मिला ना मिला. अब कांग्रेस के कार्यकर्ताओं को इतनी मांग अवश्य करनी चाहिए कि और कोई संशोधन यदि पार्टी के परम्परा गत नियमों में हो चुके हों और अभी सार्वजनिक नहीं किए गए हों तो उन्हें जरुर सार्वजनिक कर दिया जाए क्या पता कल किसी और के साथ दुर्घटना हो जाए. फिर भी सोनिया जी को बधाई देर आए दुरुस्त आए. कारण चाहे जो हों कुछ समय के लिए ही सही कुछ तो सुधार आएगा. लगे हाथ मायावती जी और हमारी अनुशासित पार्टी भाजपा भी ऐसा ही फरमान जारी कर दें तो कुछ समय के लिए चमचागीरी निलंबित हो जाए. खत्म होने का तो प्रश्न ही नहीं है सदियों से खून पसीना दे देकर सींचा है हमने चमचागीरी की फसल को.
Wednesday, April 16, 2008
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