अभी-अभी नवभारत टाइम्स में खबर पढ़ी कि पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 17 और 25 के तहत नेशनल और प्रांतीय असेम्बली का चुनाव लड़ने के लिये ग्रेजुएशन की अनिवार्यता को खत्म कर अनपढ़ लोगों को भी चुनाव लड़ने की अनुमति दे दी है। हमें तब पता लगा कि पाकिस्तान के इतने हालात खराब होने के पीछे असली कारण उनके सभी राजनीतिज्ञों का पढ़ा लिखा होना है। अरे भाई इतनी सी बात इतनी देर बाद समझ में आई, एक निगाह हमारी तरफ डाल ली होती तो अपने आप समझ में आ गया होता कि हम अपने किन पहलवानों की बदौलत राजनीति के अखाड़े में ताल ठोकते हैं। राजनीति कोई हंसी खेल है, चिट्ठे लिखने जैसा आसान काम है जो कम्प्यूटर खोला और पटापट टाइप करते चले गये। राजनीति में दिमाग का इस्तेमाल करना पड़ता है दिमाग भी आला दर्जे का जिसे बचपन से बचा कर रखना पड़ता है। अब ग्रेजुएशन करने के लिये बचपन से पढ़ाई में दिमाग लगाना पड़ेगा तो खत्म तो हो ही जायेगा। अब थोड़े से बचे हुये दिमाग से राजनीति करने की बोलो तो हो गई राजनीति।
हमारे यहां भी पहले अधिकतर राजनेता पढ़े लिखे ही हुये। बताओ क्या वो सही हालात समझ पाये थे देश का। उनको न तो भ्रष्टाचार करना आता था और ना ही जाति धर्म की बात करके लोगों को लड़ाना। फिर धीरे धीरे हमने अपने यहां अनपढ़ लोगों को नेता बनाने का प्रयोग किया देखो भ्रष्टाचार कैसा फलफूल रहा है, फिर चारों तरफ जाति धर्म की बातें सुलगाकर राजनीति की रोटियां सेंकी गई, अब जब ये मुद्दे ठंडे होने लगे तो भाषा और क्षेत्रवाद की लड़ाईयां जारी हो गई। बताओ क्या ये सब काम पढ़े लिखे नेताओं के बस की बात है क्या।
हमने अपने यहां कभी भी पढ़ाई की जरूरत राजनीति के लिये नहीं समझी और देखो कैसे पूरे विश्व में हमारा ढंका बज रहा है। चलो देर से आये लेकिन दुरूस्त आये।
1 comment:
पाकिस्तान में ग्रेजुएशन वाला नियम मुशर्रफ ने तख्तापलट के बाद लागू किया था. वर्ष 2000 से पहले ऐसा कोई कानून नहीं था.
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