Wednesday, April 30, 2008

``क्या आप ``क्या लिखें´´ की समस्या से ग्रस्त हैं

यह पोस्ट उन ब्लॉगरों के लिये नहीं है जो धड़ाधड़ छप रहे धुरंधर लिक्खाड़ों की श्रेणी में आते हैं क्योंकि उन पर या उनकी अकल्पनीय लेखन क्षमता पर ईश्वर मेहरबान है। ये पोस्ट तकनीक पर लिखने वाले ब्लॉगरों के लिये भी नहीं है क्योंकि उनके पास एक निश्चित विषय होता है और तकनीक पर लिखने वाले उंगलियों पर गिनने लायक हैं शायद इसलिये उनको ये डर नहीं होता कि कोई उनसे पहले अपना माल बाजार में ले आयेगा। ये पोस्ट तो मेरे जैसे नितिन व्यास के शब्दों में भोंदिजीवियों के लिये है जो ``क्या लिखूं´´ पर सिर खुजाने में ही पूरा दिन या पूरी रात निकाल देते हैं।मेरा तो ख्याल है कि ये समस्या शायद हर ब्लॉगर को कभी न कभी परेशान करती ही रहती होगी। जब भी लिखने बैठते हैं तो कम से कम एक सवाल तो खड़ा हो ही जाता है ``क्या लिखें´´।

क्या समाचार समीक्षा लिखें

इस विषय पर तो आप खूब लिख सकते हैं, खुल कर लिख सकते हैं परंतु यहां भी या तो ``ब्रेकिंग न्यूज´´ सुनते ही तुरंत लिखें, ये सोचे बिना लिखें कि ब्रेकिंग न्यूज कुछ घंटों बाद न्यूज बनेगी भी या नहीं क्योंकि थोड़ा सा लेट होते ही आपसे पहले आपकी सोच से मिलता-जुलता माल बाजार में भारी तादाद में आ भी चुका होगा। जबकि मेरी राय ये है कि इस विषय पर ना ही लिखें क्योंकि समाचार ही सुनना पढ़ना है तो कोई क्यों ब्लॉगों पर अपनी आंखें फोड़ेगा।

तो क्या साहित्यक रचनायें....

अगर आपके मन में कविता, कहानी, व्यंग्य या और कोई साहिित्यक रचना का विचार आ रहा है तो अति उत्तम परंतु सिर्फ आपके लिये आपके ब्लॉग की रेटिंग के लिये नहीं क्योंकि उन्हें आप ही लिखेंगे और आप ही वाचेंगे। इस समस्या को रवि रतलामी जी रचनाकार में जाहिर भी कर चुके हैं।

कुछ ब्लॉगर दूसरे साथी ब्लॉगरों की खिल्ली उड़ाते हुये कुछ लिख...

ना...ना... मैं तो ऐसी सलाह बिलकुल नहीं दूंगा क्योंकि ऐसे लेखन के लिये आपके लेखन से कहीं अधिक आपका वजनदार होना आवश्यक है नहीं तो किसी की खिल्ली उड़ाने के चक्कर में कहीं आपका ब्लॉग ही न उड़ जाये।

रवि रतलामी जी, समीरलाल जी, अनूप शुक्ल जी जैसा लेखन...

यदि आप समझते हैं कि आप इन या इन जैसे और सुपरहिट ब्लॉगरों जैसी काबलियत रखते हैं (कम से कम मुझ में तो नहीं है) तो शौक से लिखिये परंतु इतना याद रखें कि इनके विषय जरा हट के होते हैं और ये ब्लॉगिंग के सचिन तेंदुलकर हैं, लता मंगेशकर हैं, अमिताभ बच्चन हैं। हम जैसे ब्लॉगर इनके द्वारा बनाये गये व्यंजनों की खुश्बू से इनके यहां नहीं जाते बल्कि इनके यहां रोज जाकर देखते हैं कि आज क्या बना है और उसका स्वाद कैसा है। यदि आप भी ऐसे ही अनोखे व्यंजन बनाने की सोच रहे हैं तो सावधान! कहीं स्वयं ही सारे न खाना पड़ जायें।

तो आखिर क्या...क्या... लिखें

बस यही वो सवाल है जिसे सोचते-सोचते मैं तो लिख गया आप भी सोचिये कुछ तो लिख ही जायेगा।

1 comment:

राज भाटिय़ा said...

अरे इतना कुछ लिख भी दिया ओर बहुत खुब लिखा सोचते सोचते .